GST बिल सिर्फ़ एक रसीद नहीं है। कोई ज़रूरी जानकारी छूट जाए तो आपके बिज़नेस ग्राहक का इनपुट टैक्स क्रेडिट अटक सकता है, और जवाब आपको देना पड़ सकता है। यहाँ आसान भाषा में बताया है कि टैक्स इनवॉइस पर क्या-क्या ज़रूरी है, आम ग्राहकों के छोटे बिल पर क्या छोड़ सकते हैं, और ई-इनवॉइस कब लगता है।
टैक्स इनवॉइस या बिल ऑफ़ सप्लाई?
जो रजिस्टर्ड दुकान GST लेती है, वह टैक्स इनवॉइस देती है। कंपोज़िशन स्कीम वाली दुकान, या सिर्फ़ छूट वाला (exempt) माल बेचने वाली दुकान, उसकी जगह बिल ऑफ़ सप्लाई देती है, जिसमें GST नहीं लगता। यह लेख टैक्स इनवॉइस के बारे में है।
टैक्स इनवॉइस पर क्या-क्या ज़रूरी है
CGST Rules, 2017 का Rule 46 बताता है कि टैक्स इनवॉइस में क्या होना चाहिए। दुकान के लिए इसका मतलब है:
- आपकी दुकान का नाम, पता और GSTIN।
- इनवॉइस नंबर: क्रम से, वित्त वर्ष में अलग, 16 अक्षर तक, जिसमें अक्षर, अंक, हाइफ़न (-) या स्लैश (/) हो सकते हैं।
- इनवॉइस की तारीख।
- खरीदार रजिस्टर्ड हो तो उसका नाम, पता और GSTIN।
- बिना रजिस्ट्रेशन वाले खरीदार का बिल ₹50,000 या ज़्यादा हो तो: नाम, पता और राज्य का नाम व कोड।
- हर आइटम का HSN कोड (कितने अंक, नीचे देखें)।
- हर आइटम का विवरण, मात्रा और इकाई।
- कुल रकम, डिस्काउंट, और डिस्काउंट के बाद टैक्सेबल रकम।
- GST की दर और रकम: अपने राज्य की बिक्री पर CGST और SGST, दूसरे राज्य की बिक्री पर IGST।
- दूसरे राज्य की बिक्री पर प्लेस ऑफ़ सप्लाई, राज्य के नाम के साथ।
- टैक्स रिवर्स चार्ज में देना है या नहीं।
- आपके या आपके अधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर।
HSN के कितने अंक?
अगर पिछले साल आपका कुल टर्नओवर ₹5 करोड़ तक था, तो रजिस्टर्ड खरीदार (B2B) के बिल पर 4 अंकों का HSN ज़रूरी है, और आम ग्राहकों के बिल पर मर्ज़ी है। ₹5 करोड़ से ऊपर हर बिल पर 6 अंकों का HSN ज़रूरी है। आपके HSN कोड GSTR-1 की HSN समरी में भी जाते हैं, इसलिए आइटम लिस्ट में एक बार सही भर दें।
आम ग्राहकों के छोटे बिल
ज़्यादातर किराना और रिटेल बिल ₹50,000 से कम के B2C बिल होते हैं। इन पर ग्राहक का नाम या पता ज़रूरी नहीं। बाकी सब, यानी दुकान की जानकारी, आइटम, टैक्स का बँटवारा और इनवॉइस नंबर, फिर भी ज़रूरी है।
इनवॉइस नंबर जो सही रहें
इनवॉइस नंबर 16 अक्षर तक हो सकता है और वित्त वर्ष में दोहराया नहीं जा सकता। हर काउंटर की अलग सीरीज़ रख सकते हैं, जैसे K1/26-27/00045 (14 अक्षर)। नंबर दोबारा इस्तेमाल न करें, और "साफ़-सुथरा" दिखाने के लिए नंबर न छोड़ें; बीच में खाली नंबर सवाल खड़े करता है। अच्छा बिलिंग सॉफ्टवेयर नंबर खुद लगाता है और दोहराने नहीं देता।
ई-इनवॉइस कब लगता है?
अगर 2017-18 से किसी भी वित्त वर्ष में आपका कुल टर्नओवर ₹5 करोड़ से ऊपर गया है, तो ई-इनवॉइस लगता है। यह B2B बिलों (और एक्सपोर्ट व उनके क्रेडिट/डेबिट नोट) पर लगता है, आम ग्राहकों के बिलों पर नहीं। साल के बीच सीमा पार हो तो अगले वित्त वर्ष से शुरू होता है। ज़्यादातर छोटी दुकानें इस सीमा से नीचे हैं।
प्रिंट से पहले एक नज़र
| बिल का प्रकार | खरीदार की जानकारी | टैक्स |
|---|---|---|
| B2C, अपना राज्य, ₹50,000 से कम | ज़रूरी नहीं | CGST + SGST |
| B2C, ₹50,000 या ज़्यादा | नाम, पता, राज्य का नाम और कोड | CGST + SGST या IGST |
| B2B (रजिस्टर्ड खरीदार) | नाम, पता, GSTIN | CGST + SGST या IGST |
| कंपोज़िशन या छूट वाली बिक्री | ऊपर जैसा, पर यह बिल ऑफ़ सप्लाई है | GST नहीं लगता |
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स्रोत: CGST Rules, 2017 का Rule 46 और उसके तहत ई-इनवॉइस की अधिसूचनाएँ। नियम और सीमाएँ बदलती रहती हैं; मौजूदा स्थिति अपने CA से पक्की करें।
यह लेख सामान्य जानकारी है, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। GST के नियम बदलते रहते हैं; रिटर्न भरने से पहले GST पोर्टल देखें या अपने CA से पूछें। आधिकारिक स्रोतों से जाँचा: 4 अक्टूबर 2026.